तीसरे दिन श्री मद भागवत कथा सप्ताह में ज्ञान की गंगा में डूबे रहे श्रद्धालु
Third Day of the Shrimad Bhagwat Katha
प्रभु भक्ति ही आत्मा की शुद्धि का मार्ग है: कथा व्यास महेश माधव शास्त्री
भागवत कथा सुनने से जीवन में सुख, आरोग्य और कल्याण प्राप्त होता है: कथा व्यास महेश माधव शास्त्री
पलवल। दयाराम वशिष्ठ: Third Day of the Shrimad Bhagwat Katha: पलवल जिले के गांव बघौला के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्री मद भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन भागवत भूषण श्री महेश माधव शास्त्री जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से आत्मिक ज्ञान से भर दिया। कथा के दौरान, उन्होंने शिव चरित्र, सृष्टि प्रकरण, विदुर संवाद और ध्रुव चरित्र का विस्तृत वर्णन किया, जिससे श्रोताओं का मन आध्यात्मिकता के सागर में डूब गया।

श्री शास्त्री जी ने अपने प्रवचन में कहा, "जीवस्य तत्व जिज्ञासा नार्थो येस्त कर्मभि:।" अर्थात मानव जीवन का मुख्य लक्ष्य तत्व विज्ञान को जानना है। उन्होंने भागवत वाग्मय को 'साहित्य का मुकुट' करार देते हुए कहा कि यह ग्रंथ कलियुग के पापों को दूर करने की शक्ति रखता है। भागवत, वेदांत दर्शन का सार होने के साथ-साथ, आत्मिक और भौतिक दोनों मनोकामनाओं को पूर्ण करने में सक्षम है।

श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस कथा में भाग ले रहे हैं। कथा के दौरान, शास्त्री जी ने कहा, "प्रभु के चरणों में प्रेम ही सबसे बड़ा सुकृत है। सभी वेद, पुराण और संतों का मत यही है कि प्रेम के वश में प्रभु होते हैं।" इस संदर्भ में उन्होंने प्रेम, संत्संग और हरिकथा के महत्व पर जोर दिया।
कथा सुनने आए श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर देखने को मिली। स्थानीय निवासियों का कहना है कि "इस कथा के माध्यम से हमें जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने का अवसर मिला है। प्रभु भक्ति ही हमारी आत्मा की शुद्धि का मार्ग है।" मंदिर में मूर्ति स्थापना के साथ साथ "यह कथा हमारे गांव के लिए एक नई ऊर्जा लेकर आई है। हम सभी को इस ज्ञान का लाभ उठाना चाहिए।"

इस कथा के तीन दिनों में ही गांववासियों में धार्मिक जागरूकता और आध्यात्मिकता का जो सैलाब देखने को मिला है, वह निश्चित रूप से प्रशंसा का पात्र है। जैसे-जैसे यह सप्ताह आगे बढ़ रहा है, भागवत कथा का प्रभाव और भी गहरा होता जा रहा है।
श्री महेश माधव शास्त्री जी ने सभी को सच्चे प्रेम और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। अंत में, उन्होंने कहा, "भक्ति ही ईश्वर तक पहुंचने का सार है।" इस संदेश के साथ, कथा का वातावरण भक्तिमय बन गया, जहां सभी श्रद्धालु एकजुट होकर प्रभु की भक्ति में लीन हो गए।
श्री मद भागवत कथा सप्ताह का यह आयोजन निश्चित रूप से बघौला के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय बनने जा रहा है, जो न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देगा। अंततः, यह कथा ज्ञान की गंगा में सभी को डुबकी लगाने का अवसर प्रदान करती है और सभी के हृदय में प्रेम और भक्ति का दीप जलाती है।